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हंडिया

श्रेणी ऐतिहासिक, धार्मिक

हरदा जिला मुख्यालय से लगभग 21 किलोमीटर उत्तर में एक अत्यन्त प्राचीन स्थान हैः- हंडिया मान्यता है कि हंडिया नर्मदा नदी के मध्यबिन्दु पर स्थित है और नर्मदा परिक्रमा करने वाले भक्तजन यहीं से अपनी तीर्थ यात्रा प्रारम्भ करते है। जनश्रृति के अनुसार इसी स्थान पर पौराणिक ऋषि जमदाग्नि तथा हैहय वंश के सहस्त्रार्जन का मिलन हुआ था। दिल्ली एवं दक्षिण भारत के मार्ग में नर्मदा तट पर स्थित हंडिया मुगलकाल में प्रशासनिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं सामरिक सभी दृष्टियोंसे एक महत्वपूर्ण स्थान रहा था। कहा जाता है कि बल्क के राजा नाजिर उद्दीन हंडिया आकर फकीर के रूप में बस गए थे, जो हंडिया शाह भंडग के नाम से जाने जाते थे। माण्डू के सुल्तान हुषंगशाह गोरी ने यहाँ एक किले का निर्माण कराया था। आइने-अकबरी के अनुसार हंडिया को मालवा सूबे की सरकार का दर्जा प्राप्त था। 18 वी शताब्दी में मराठा हंडिया को मालवा सूबे की सरकार का दर्जा प्राप्त था। 18 वीं शताबदी में मराठा शासन के दौरान राजधानी हंडिया से हरदा स्थानांतरित कर दी गई। यहां मुगलकाल में निर्मित वास्तुकला के भग्नावशेष बहुतायत में है। वर्तमान में क्षेत्र में स्थित पुरातात्विक धरोहरों एवं आसपास के स्थानों के सरंक्षण एवं सौन्दर्यीकरण का कार्य पुरात्तव विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रावधान में किया जा रहा है।

फोटो गैलरी

  • नर्मदा नदी

कैसे पहुंचें:

हवाई मार्ग द्वारा

इंदौर हवाई अड्डे से १६० कि मी

ट्रेन द्वारा

हरदा स्टेशन से ३० कि मी

सड़क के द्वारा

हरदा - इंदौर रोड पर स्थित